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| Mussorie |
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मनुष्य जब संसार के कोलाहल से ऊब जाता है,तब किसी रमणीक स्थान की यात्रा
से उसे एक नये उमंग व जोश की प्राप्ति होती है। मेरे साथ भी कुछ एैसा ही
हुआ और मैंने अपने परिवारजनों के संग पर्वतों की रानी मसूरी जाने का
कार्यक्रम बनाया। मसूरी,उसी हिमालय कि गोद में बसी है जिसकी नैसर्गिक आभा
मन को पावन बना देती है। देहरदून से मसूरी की हवाई दूरी कम है पर सड़क मार्ग
से जाने के कारण हमें कुछ ज्यादा वक़्त लगा। मसूरी में सर्वप्रथम हम
सुप्रसिद्ध कैम्पटी फाल्स गए। मैं वहाँ नहाने का लोभ संवरण न कर पाया
क्योंकि इस झरने का शीतल जल, बर्फीली हवाओं के झोकों संग मिल एक अनूठा
अहसास दे रहा था। फिर,पास ही में गढ़वाली पोशाक में फोटो खिंचवाने के बाद हम
केमल्स बैंक रोड गये। वहाँ हमने दूरबीन से हिमालय की मनोहारी व अनुपम
छटाओं के दर्शन किए। दूर पहाड़ों की चोटियाँ बर्फ से ढ़की हुई ऐसी जान पड़ रही
थीं मानो सर्दी से बचने हेतु श्वेत वस्त्र धारण किए हों। चप्पे चप्पे पर
पर्यटन का ख़जाना लिए है मसूरी.....यहाँ का समृद्ध वनाँचल,इठलाते प्यारे
ऊँचे नीचे पहाड़,नागिन सी बलखाती सड़कें और प्रकृति की असीमित अद्भुत कारीगरी
...जिनका वर्णन आप जीवन मैग पर जल्द ही प्रकाशित होने वाले वृहद यात्रा
वृतांत में पढ़ सकते हैं। ख़ैर क़िस्सा म़ुख्तसर कि मसूरी से आने के बाद भी
वहाँ के मनोरम वादियों की पुकार कानों में गूंज रही थी।मसूरी की वह
अविस्मरणीय यात्रा तो समाप्त हो गयी पर यात्रा का अंत कहाँ है ? जीवन भी तो
एक सुहाना सफर है, जहाँ सिर्फ चलते ही जाना है।
सुधी पाठकों से अनुरोध है कि वे इस यात्रा वर्णन का रसास्वादन कर मुझे अपनी प्रतिक्रियाओं से अवगत करायें....धन्यवाद....
आकाश कुमार (14 वर्ष )http://www.jeevanmag.com