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Saturday, 22 December 2012

दिल्ली: कंट्री कैपिटल या रेप कैपिटल?

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दिल्ली बलात्कार कांड ---हम शर्मिंदा हैं 


राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में अपराध की घटनाओं पर लगाम लगाने में विफल रहने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए भाजपा ने मंगलवार को कहा कि बलात्कार के दोषी लोगों को फांसी देनी चाहिए।

मुख्य विपक्षी पार्टी ने इस विषय पर संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस दिया। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि यह गंभीर मुद्दा है, ऐसी घटनाएं बार बार हो रही है। हम इस मुद्दे को संसद में पूरी ताकत से उठायेंगे।
उन्होंने कहा कि राजग के सहयोगी दलों की महिला सांसद संसद भवन परिसर मे इस विषय पर धरना देंगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली महिलाओं के खिलाफ अत्याचार का केंद्र हो गया है और पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।

प्रसाद ने कहा कि भाजपा हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र को विशेष दर्जा प्रदान करने के बारे में संविधान संशोधन विधेयक के गंभीर मुद्दे को भी लोकसभा में उठायेगी। हालांकि उन्होंने इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया।

भाजपा सदस्य सैयद शाहनवाज हुसैन ने इस विषय को उठाते हुए कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है, दिल्ली में कानून व्यवस्था समाप्त हो गई है। इस विषय पर हमने प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस दिया है।

मीरा कुमार ने उद्वेलित सदस्यों को शांत करते हुए कहा कि यह गंभीर मामला है, जघन्य कृत्य है। इसे शून्य प्रहर में उठायें।

गौरतलब है कि दिल्ली में उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाली एक पैरा मेडिकल छात्रा के साथ बस में कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर उसे बाहर फेंक दिया गया।

दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर फिर से गंभीर सवाल खड़ा करने वाली यह घटना दक्षिणी दिल्ली के महिपालपुर के निकट घटी। पीड़िता एवं उसके दोस्त की आरोपियों ने पिटाई की।

दोनों को एम्स ट्रामा सेंटर ले जाया गया। बाद में लड़की को सफदरजंग अस्पताल स्थानांतरित कर दिया गया। लड़की की हालत गंभीर बताई गई है। बलात्कार और निर्दयी यातनाओं के बाद रविवार को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती लड़की को अब भी अस्पताल के सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में रखा गया है।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बीडी अठानी ने कहा कि उसकी स्थिति कल से बेहतर हुई है। उसकी चेतना का स्तर कल से काफी बेहतर हुआ है। उसकी रविवार को एक सर्जरी हुई है। उन्होंने कहा कि पीड़ित लड़की पर अगले 48 से 72 घंटों तक डॉक्टरों द्वारा करीबी नजर रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि डॉक्टर नियमित रूप से उसकी स्थिति देख रहे हैं, ताकि उसका सर्वश्रेष्ठ इलाज हो सके।

डॉक्टर ने कहा कि लड़की का चेतना स्तर कल से काफी बेहतर हुआ है और उसका लगातार इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि चोटों की प्रकृति को देखते हुए हम अब भी उसे खतरे से बाहर नहीं कह सकते। डॉक्टरों ने कहा कि मेडिकल छात्रा के सिर और चेहरे पर काफी चोटें लगी हैं, क्योंकि उस पर लोहे की छड़ से निर्दयता से हमला किया गया।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को कहा कि सरकार को ऐसे कड़े कदम उठाने चाहिए जिससे कि सामूहिक बलात्कार जैसी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो जैसा कि राजधानी में 23 वर्षीय एक लड़की के साथ हुआ। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सामूहिक बलात्कार की शिकार 23 वर्षीय लड़की की हालत के बारे में जानकारी लेने सफदरजंग अस्पताल पहुंचीं।

सोनिया ने गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा से बातचीत की और उनसे हरसंभव कदम उठाने को कहा जिससे सुनिश्चित हो कि इस तरह की घटनाएं फिर से न हों।

कांग्रेस महासचिव जर्नादन द्विवेदी ने कहा कि सामूहिक दुष्कर्म मामले पर सोनिया चाहती हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाए। इससे पहले दिन में संसद के दोनों सदनों ने दक्षिण दिल्ली में चलती बस में एक लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना पर चिंता व्यक्त की।

पार्टी विचारधारा से उपर उठकर विभिन्न दलों के सदस्यों ने ऐसे अपराध को अंजाम देने वालों को मृत्युदंड देने की मांग की.....


सन्दर्भ- जीवन मैग फेसबुक पेज... www.facebook.com/jeevanmag

अब पढ़िए इस विषय पर गुलाम कुन्दनम  की  एक कविता

Delhi rape issue

पुजारी ही बदलने होंगे.
.................................

अध्यात्म और नैतिक शिक्षा
व्यवहार में उतारने की दीक्षा
ये शिक्षा नीति बनाने के लिए
शिक्षा मंत्री ही बदलने होंगे.

छोड़ें भौतिक - भोगवादी जीवन
अपनाएँ मानवतावादी नवजीवन,
ये सोंच विकसित करने के लिए
योजनायें भी बदलने होंगे.

सरलता शालीनता में हो आस्था,
बदलने होंगे सामाजिक व्यवस्था,
माहौल को बदलने के लिए
व्यवस्थापक भी बदलने होंगे .

जो खुद ही नंगा नाच करते,
वे कड़े क़ानून बनाने से डरते,
माँ भारती के सम्मान के लिए
अब पुजारी ही बदलने होंगे. ..2


ॐ . ੴ . اللّٰه . † ……. Om.Onkar. Allâh.God….. Jai Hind! Jai Jagat (Universe)! -

Ghulam Kundanam,.Mobile No- 9931018391.

बाबा नागार्जुन की दो कवितायेँ---संसद को लकवा मार गया है

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 बाबा नागार्जुन की दो कवितायेँ जो आज भी काफी प्रासंगिक हैं, संसद को लकवा मार गया है और सत्य।
 हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर रहे नागार्जुन को जीवन मैग टीम की ओर से शत-शत नमन।

सौजन्य से- गुलाम कुन्दनम (फेसबुक पेज पर जाने के लिए यहाँ क्लिक करें)

Thursday, 20 December 2012

प्रेमगान- पवन कुमार


लोहे  के पेड़ हरे होंगे, तू गान प्रेम का गाता चल।            
नम होगी यह मिट्टी जरुर, आँसू के कण बरसाता चल॥
प्रेम तो है बस मधुरिम गीत,
तू गीत इसी का गाता चल।
मिल जायेंगे प्रभु भी एक दिन,
दिल में तूफान बहाता चल॥

प्रेम का नाम है गुंजनवन,
तू भौंरा इसका बनता चल।
पंखों में बेड़ी बाँध न तू,
गहरी उड़ान बस भरता चल॥

प्रेमी का न तो नाम‍‍‍‍‍‍‍-पता,
न होता उसका कोई भू-‍स्थल।
प्रेम का भजन वो गाता है,
बन जाता है अविचल॥

प्रेम के राह में ठोकर हैं,
पाकर इसे जाते प्रेमी मचल।
जीना उन्हे् गवारा नहीं,
पर जी जाते हैं प्रेम के बल॥

टीम मेम्बर
जीवन मैग http://www.jeevanmag.tk 

Monday, 17 December 2012

निष्काम भक्ति और निष्काम देशभक्ति- गुलाम कुन्दनम


निष्काम भक्ति
-----------------

सकाम भक्ति से
क्षणिक सांसारिक
सुख मिलता.

निष्काम भक्ति से
अनंत असीमित
आनंद घुलता.

सकाम मुल्ला-महंथ
लालच-घृणा
अंधविश्वास फैलाते.

निष्काम संत-फकीर
सबके दिलों में प्रेम की
गंगा-जमुना बहाते.

(धर्म-मजहब को.... मंदिर-मस्जिद-गिरजाघर-गुरुद्वारों को ... पाक - पवित्र बनाना है तो उसकी जिम्मेवारी निष्काम भक्क्ति करने वाले संत-फकीरों को मिलनी चाहिए जो धन संग्रह नहीं करते... धर्म स्थलों को व्यापार का साधन नहीं बनाते... जिन्हें शिर्फ़ अपने खाने पहनने से ज्यादा कुछ नहीं चाहिए होता है.... धर्म स्थलों की आमदनी को गरीबी उन्मूलन कोष बनाकर गरीबनावाजी के काम में ...दरिद्र नारायण के उत्थान में लगाया जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए. )

निष्काम देशभक्ति
---------------------

सकाम देशभक्ति से
पद और पैसे का
लोभ आ जाते.

निष्काम देशभक्ति से
हम शहीदों का
कर्ज चुकाते.

सकाम नेता भी
समाज में
घृणा फैलाते.

जाति-संप्रदाय
भाषा क्षेत्र पर हमें
वोट बैंक बनाते.

निष्काम नेता होते
न वतन टूटता, न हम
भाई भाई का खून बहाते.

(सम्पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन :- दल विहीन लोकतंत्र की स्थापना , लाभ रहित विशुद्ध समाज सेवा वाली राजनैतिक व्यवस्था, वर्ग विहीन समाज की स्थापना, सबके लिए समान और निःशुल्क शिक्षा व्यवस्था, गरीबी उन्मूलन कोष की स्थापना [धर्म स्थलों की आमदनी भी इसी कोष में जमा हो], जनलोकपाल, चुनाव सुधार तथा काला धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने जैसे क़ानून, सभी करों को समाप्त कर एक समान कर प्रणाली ट्रांजेक्सन टैक्स लगाना, सभी तरह के लेन-देन बैंक, चेक या मोबाइल के द्वारा किया जाना सुनिश्चित करना, बड़े नोटों का प्रचलन बंद करना....सरकार के निर्णयों में जनता की प्रत्यक्ष भागीदारी... ग्राम स्वराज और मोहल्ला स्वराज की स्थापना ... ये सब कुछ नए और विचाराधीन समाधान हैं .....जो भारत और भारत के लोगों को संच्चाई, ईमानदारी और मानवता पर आधारित एक नए युग में ले जायेंगे.)
ईश्वर से मेरी प्रार्थना है वो भारत को ऐसे सपूत दें ....
..जो मादर-ए-हिंद... माँ भारती .... की निष्काम देशभक्ति करें....

ॐ . ੴ . اللّٰه . † …….
Om.Onkar. Allâh.God…..
Jai Hind! Jai Jagat (Universe)!

-Ghulam Kundanam,
Team Jeevan Mag
Volunteer
Mobile No- 9931018391.
www.jeevanmag.tk

Saturday, 15 December 2012

Jeevan Mag Documentary by Students

Friday, 30 November 2012

धर्म-मजहब की सीमा- गुलाम कुन्दनम








 आत्मिक-रूहानी उन्नति का मार्ग,
बताना-दिखाना ही धर्म का कार्य,
पूजा - नमाज - अरदास - प्रार्थना
की विधियाँ बतायें इनके आचार्य.

फतवे-फरमान-आदेश-हिदायत,
जैसे नहीं हो अनुचित अधिकार,
सुझाव-सलाह तक सीमित रहें वो,
प्रसारित करें वो सिर्फ़ सुविचार.

इंसानियत-मानवता की कसौटी,
बने किसी भी कानून का आधार.
धर्म-मजहब की आड़ में कोई ,
करे न मानवता को तार -तार.


कपडे, खान-पान और कानून में धर्म-मजहब को घसीटा जाना अनुचित है. आधुनिक आयरलैंड में अन्धविश्वास-आधारित कानून की वजह से सविता हलप्पनवार की दुखद मृत्यु आज के आधुनिक युग में भी हमारे अन्धविश्वासी होने का प्रमाण है. पुरे विश्व समुदाय को धार्मिक नेताओं के अधिकारों की सीमा निर्धारित करने पर विचार करने की जरूरत है. आम जीवन में अनावश्यक दखल लगभग सभी धर्म - मजहब के नेताओं का देखा जाता है. दलीय वोट बैंक की राजनीती ने भी इन मान्यताओं को संरक्षण और प्रोत्साहन दिया है. भारत में भी हर संप्रदाय में इसके उदहारण मौजूद हैं.
सविता हलप्पनवार
धार्मिक नेताओं का कार्य क्षेत्र पूजा-अर्चना और नैतिक शिक्षा-सलाह तक सीमित  रखकर, कानून का आधार इंसानियत-मानवता को बनाकर तथा राजनीती को दल रहित और लाभ रहित बनाकर नए और सुखी समाज की स्थापना की जा सकती है.

ॐ . ੴ . اللّٰه . † …….
Om.Onkar. Allâh.God…..
Jai Hind! Jai Jagat (Universe)!
                                                                           ----------- ग़ुलाम कुन्दनम 

Tuesday, 20 November 2012

Read Jeevan Mag August-December 2012 issue!!!



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Saturday, 17 November 2012

सच्ची दिवाली- आकाश कुमार

कब तक रहेगा शासक, तम?
तब तक, जब तक नहीं जागेंगे आप और हम।
आज प्रकाश के पुनीत-पर्व पर लें संकल्प,
समाज का करेंगे कायाकल्प।

तिमिर का होगा सफाया जग से,
विचलित  ना होना पथिक अपने 'जीवन मग' से।
नवीन मानव की नवीन गर्जना,
करेगी नवीन भारत की नवीन सर्जना।

छंट जायेगा मन का अँधियारा,
आएगी हर चेहरे पर हरियाली।
चमक उठेगा जग सारा,
और मनेगी सच्ची दिवाली।

                   ------आकाश कुमार (15 वर्ष)

Friday, 9 November 2012

मुश्किलों में घिरे गडकरी- प्रशांत कुमार

Gadkari in a fix
भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी पर संकट के काले बादल मंडराने लगे हैं। गडकरी पहले से ही भ्रष्टचार के आरोपों और विवादों का सामना कर रहे हैं। अब गडकरी के खिलाफ पार्टी के भीतर भी बगावत शुरु हो गई है।
वकील और भाजपा नेता महेश जेठमलानी ने गडकरी पर हमला बोलते हुए पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया हैं। महेश ने इस्तीफा गडकरी के खिलाफ हाल में लगे भष्टाचार के आरोपों के कारण दिया। महेश जेठमलानी ने कहा था कि अगर गडकरी भाजापा के अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं देते है तो वह पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारणी से हट जायेंगे। जेठमलानी का कहना है कि जब तक गडकरी पार्टी के अध्यक्ष पद पर रहेंगे तब तक उनका राष्ट्रीय कार्यकारिणी में बने रहना नैतिक तौर पर सही नहीं होगा।
महेश जेठमलानी का यह खुला हमला इसलिए भी अहम हैं, क्योंकि संघ ने गडकरी के दूसरे कार्यकाल का फैसला पार्टी नेताओं के हाथ में दे दिया हैं। महेश के पिता व सिनियर वकील राम जेठमलानी भी गडकरी के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी में उनके खिलाफ विरोध से उन्हें दूसरा कार्यकाल मिलने की संभावना काफी कम नजर आ रही हैं।
 विवादित बयान
दूसरी तरफ, भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के एक विवादित बयान ने भी उनकी मुसीबतें बढ़ा दी हैं। गडकरी ने एक बयान में कहा कि स्वामी विवेकानंद और अंडरवलर्ड सरगना दाऊद इब्राहिम का आईक्यू एक समान हैं।
मध्य प्रदेश के एक दिवसीय प्रवास पर आए गडकरी ने राजधानी भोपाल स्थित रवींद्र भवन में आयोजित ओजस्वनी अलंकरण समारोह में यह विवादित बयान दिया। उन्होंने ने बुद्धिमत्ता कौशल की चर्चा करते हुए कहा कि विज्ञान की भाषा में कहें तो विवेकानंद और दाऊद का आईक्यू एक समान हैं। दाऊद ने इसका उपयोग विनाशकारी उद्देश्यों और गुनाह की दुनिया में किया तो वह उस काली दुनिया का शहंशाह बन गया और नरेंद्र ने इसका उपयोग समाज, देश और अध्यात्म के लिए किया तो वह विवेकानंद बन गए।
बयान से पलटे गडकरी
बाद में बयान के कारण विवाद की आशंका को देखते हुए नितिन गडकरी ने मीडिया द्वारा उनके बयान को गलत रूप से पेश करने की बात कही। गडकरी ने कहा कि उन्होंने दोनों के बैध्दिक स्तर की तुलना की थी, व्यक्तित्व की नहीं।
भोपाल में दिए गए उनके भाषण पर जब संवाददाताओं ने उनसे पुछा तो उन्होंने कहा कि मैंने स्वामी विवेकानंद और दाऊद इब्राहिम के बीच कोई तुलना नहीं की, मैंने कहा था अगर कोई व्यक्ति अपनी बुध्दि का इस्तेमाल करे तो वह विवेकानंद या फिर दाऊद बन सकता हैं।
भाजपा नेता बलबीर पुंज ने भी गडकरी का साथ देते हुए इससे इनकार किया कि गडकरी ने विवेकानंद की तुलना दाऊद से की है। पुंज ने कहा कि गडकरी ने विवेकानंद की तुलना दाऊद से नहीं की, उन्होंने सिर्फ दोनों के बीच के विरोधाभास को स्पष्ट किया था। गडकरी सिर्फ यह कह रहे थे कि किस तरह सत्ता, धन या बुध्दि अच्छे या बुरे कार्य के लिए उपयोग की जा सकती हैं।
इस नए विवाद के कारण गडकरी कांग्रेस के भी निशाने पर आ गए हैं। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि देश के किसी महान विचारक की तुलना एक कुख्यात आतंकवादी से करना दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इससे भाजपा की मानसिकता सबके सामने आ गई हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि गडकरी इन सभी संकटो का सामना कर अपने अध्यक्ष पद को बचा पाते हैं या नहीं।
प्रशांत कुमार
स्वतंत्र पत्रकार; व
सदस्य ,
टीम जीवन मैग
D-58B, South extension Part-1
 New Delhi-110049
E-mail ID- prashantkumar9560@gmail.com

Sunday, 28 October 2012

Chakravyuh(चक्रव्यूह) Movie Review- आकाश कुमार

Movie reviewed By---Akash Kumar
Download Chakravyuh Movie CLick Here---

नक्सलवाद की समस्या पर केन्द्रित यह फिल्म अपने मक़सद में काफी हद तक कामयाब रही है. आज जहाँ सिनेमा गाँवों से मुंह मोड़ रहा है वहीँ प्रकाश झा अपनी इस फिल्म के माध्यम से ग्रामीण इलाकों के समस्याओं की बखूबी तसदीक़ करते नज़र आते हैं.
पृष्ठभूमि है नंदीघाट नामक मध्य भारत के एक नक्सल-प्रभावित जिले की. आदिल खान ( अर्जुन रामपाल) नामक एक कर्मठ पुलिस अधिकारी वहां एस.पी बनकर जाता है. राजन (मनोज बाजपेयी) की अगुवाई में नक्सलियों का इस जिले में वर्चस्व है. नंदीघाट में 'सरकार' की नहीं, नक्सलियों के 'जनताना सरकार' की चलती है. जनता भी नक्सलियों के साथ है.
फिल्म में कथित विकास की अवधारणा पर भी सवाल उठाये गए हैं. पॉवर प्रोजेक्ट के लिए ग्रामीणों की जमीन का जबरन अधिग्रहण किया जाता है.इससे जनता का रोष काफी बढ़ जाता है और साथ-साथ तेजी मिलती है नक्सली आन्दोलन को. आदिल नक्सली गतिविधियों को हतोत्साहित करने के लिए राजन के गिरफ़्तारी की अहमियत को भांप लेता है. वह अपने दोस्त कबीर (अभय देओल) को बतौर मुख़्रबिर नक्सलियों के पास भेजता है. कबीर के सहारे पुलिस राजन को अपनी गिरफ्त में ले लेती है और नक्सलियों को काफी क्षति पहुँचती है. इधर कबीर को तंत्र की विफलता और पुलिसिया बर्बरता के 'चक्रव्यूह' में  नक्सलियों द्वारा अपनाया गया रास्ता, एकमात्र रास्ता लगने लगता है और अब वह मन से भी नक्सली हो जाता है.
फिल्म काफी अच्छी बनी है. कलाकारों ने बेहतरीन एक्टिंग की है. अर्जुन रामपाल एक  पुलिस औफ़िसर की भूमिका में जंचे हैं. अभय देओल का तो जवाब नहीं- उन्हें ऑफबीट फिल्मों का राजकुमार कहा जाये तो को अतिश्योक्ति नहीं होगी. मनोज बाजपेयी ने छोटा मगर दमदार रोल निभाया है- उनके हरेक संवाद पर सिनेमा हॉल तालियों से गूँज उठता है. ओम पूरी ने भी अपने किरदार के साथ न्याय किया है. महिला कलाकारों में अंजलि पाटिल ने नक्सली कमांडर जूही के अपने किरदार को जीवंत कर दिया है. फिल्म का संगीत औसत दर्जे का है- 'महंगाई' वाले नाट्य गीत को छोड़ कोई भी गाना अपनी छाप नहीं छोड़ता. निर्देशन व फिल्मांकन क़ाबिले-तारीफ़ है.
'प्रकाश झा टच' पूरी फिल्म में मौजूद है जो की इसे असल जिन्दगी के काफी करीब लाती है. दामुल, मृत्युदंड, गंगाजल, राजनीति,आरक्षण और अब चक्रव्यूह- प्रकाश झा ने यहाँ भी अपना १०० प्रतिशत दिया है. यह मूवी नक्सलियों के प्रति आम आदमी के दृष्टिकोण को सशक्त करती है. इस फिल्म की ढेर सारी खूबियाँ इसे बनाती हैं---
                                                        A Must Watch

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 अंग्रेजी में रीव्यू  पढने के लिए देखते रहें जीवन मैग  --- http://www.jeevanmag.tk
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Chakravyuh - A War You Cannot Escape
Directed byPrakash Jha
Produced byPrakash Jha
Sunil Lulla
Written byAnjum Rajabali
Sagar Pandya
Screenplay byAnjum Rajabali
Prakash Jha
StarringArjun Rampal
Abhay Deol
Manoj Bajpayee
Kabir Bedi
Om Puri
Anjali Patil
Esha Gupta
Sameera Reddy
Music bySalim-Sulaiman, Aadesh Shrivastava, Shantanu Moitra, Sandesh Shandilya, Vijay Verma.
CinematographySachin Krishna
Editing bySantosh Mandal
StudioPrakash Jha Productions
Eros International Media Ltd (EIML)[1]
Distributed byBase Industries Groups
Release date(s)
  • 24 October 2012
[2]
CountryIndia
LanguageHindi
Box office7.00 c (3 day domestic nett)[3][4][5]

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