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Sunday, 25 August 2013

हे भागीरथी बोलो तो- नंदलाल मिश्रा




हे भागीरथी बोलो तो !
क्योँ हो मौन शांत कुछ तो उत्तर दो ?
हे भागीरथी बोलो तो !

करने तुम जिनका उद्धार
आई छोड़ स्वर्ग द्वार
वे कर रहे नित - नित
तेरा दूषण - प्रतिकार
क्यों  लौट न जाती छोड़
धरा स्वर्ग को ?
हे भागीरथी बोलो तो !
कर तनिक कलयुग ध्यान
रहा न मातृ पितृ सेवा ज्ञान
आशा तेरी बेकार निराधार है
पुत्र तेरे दुखों से अनजान
क्या 'माता हो न कुमाता' के
मृदुल वैभव की रखवाली हो?
हे भागीरथी बोलो तो !

या तोड़ दो बांध सारे
 डुबो दो भूतल किनारे
 या भर दो मानव-उर में
 प्रेम बीज प्यारे प्यारे
क्या हुई तुम भी
वृद्ध-क्षीण-अशुच हो ?
हे भागीरथी बोलो तो !
क्योँ हो मौन शांत
कुछ तो उत्तर दो ?
हे भागीरथी बोलो तो !



नंदलाल मिश्रा
प्रबंध संपादक- जीवन मैग 
छात्र, बी.टेक मानविकी (प्रथम वर्ष)
दिल्ली विश्वविद्यालय  

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Heartiest Congratulations to Mr. Nandlal Sumit, Executive editor (Jeevan Mag) for topping the entrance exam of B.tech in Humanities...God bless you with success
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Here is the result...Click!!!
जीवन मैग जनवरी 2014 अंक से उद्धृत- मूल अंक यहाँ से डाउनलोड करें - https://ia600505.us.archive.org/7/items/JeevanMag4/Jeevan%20Mag%204.pdf

थोड़े से नमकीन शब्द- संजय शेफर्ड

मेरे थोड़े से नमकीन शब्द
रखकर देखना
तुम अपनी कड़वी जुबान पर
जीवन जब मीठेपन से भर जाए
तुम्हें जरुरत पड़ेगी
मेरे आवश्यकता से थोड़े ज्यादा
तीखे, कड़वे, कसैले शब्दों की
सच मानों
चाहे तो चखकर देख लो
यह शब्द उतने नमकीन नहीं
जितने तुम्हारे तलवार की धार है
यह काटते जरुर हैं
लेकिन तुम्हारी तलवार की माफ़िक
लहुलुहान नहीं करते
जिस्म को . . .
और यह शब्दों का कड़वापन क्या ?
लहू से ज्यादा तो . . .
किसी हाल में नहीं हो सकता ?
तुम तो लहू पीकर ही जिन्दा रहे हो
फिर मेरे शब्दों से परहेज क्यों ?
एक बार चखकर देखना
कुछ नहीं तो स्वाद के नयेपन के लिए!
 - संजय शेफर्ड, शोधकर्ता
बी.बी.सी हिन्दी
 





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Tuesday, 30 July 2013

नीति और नियत- ग़ुलाम कुन्दनम

बात भी हो अच्छे-अच्छे,
व्यवहार में भी सच्चे-सच्चे,
दुनिया सिर्फ नीतियों से नहीं,
नियत से भी बदलती है।

दुनिया सिर्फ नीतियों से नहीं,
नियत से भी बदलती है।

पैदल-साइकिल आम सवारी
इन से नापेंगे दुनिया सारी,
हमारी गाड़ी पेट्रोल से नहीं,
सिर्फ पसीने से ही चलती है।

दुनिया सिर्फ नीतियों से नहीं,
नियत से भी बदलती है।

हिम्मत के साथ नेक इरादे,
करते नहीं हम झूठे वादे,
देश के प्रति ऐसी श्रद्धा से,
दीप से दीप जलती है।

दुनिया सिर्फ नीतियों से नहीं,
नियत से भी बदलती है।

- ग़ुलाम कुन्दनम

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Thursday, 18 July 2013

राजनीति का खेल- शिवनाथ सिंह 'शिव'


राजनीति के खेल में,विकल है सारे संत |
हरदम सिक्का न चले, कभी तो होगा अंत ||

कैसे सबको मिलेगा,शिक्षा व रोजगार |
दीमक भ्रष्टाचार का ,सुस्त पडी सरकार ||

नित मर्यादाएं टूटती ,टूटे सब्र के बाँध |
लूट से कैसे अब बचे ,सम्पति अतुल अगाध ||

-----------शिवनाथ सिंह 'शिव'


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Saturday, 22 June 2013

हँसी की एक कक्षा- आकाश कुमार


कवि - आकाश कुमार 
 प्रमुख संपादक (जीवन मैग)
(फेसबुक पर जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें) 




एक कक्षा का है दृश्य-

शिक्षक कर रहे हैं छात्रों का इंतज़ार,
कक्षा में सबकी अनुपस्थिति कर रही उन्हें बेक़रार।
तभी दिख पड़ते हैं आते छात्र दो-चार,
मास्टर जी करते हैं उन पर शब्दों का वार-
कहाँ थे इतनी देर तलक?
सर, फेसबुक पर कर रहे थे बक-बक।
तो फिर आने की क्या थी ज़रुरत?
बंटने वाले हैं आज साईकिल के पैसे,
तो फिर हम आते नहीं कैसे?
जय-जय भारत भाग्य विधाता,
ऐसे पाजी बच्चों से अब तू ही बचा भारतमाता।
अरे बेवकूफों, तुम हो पढाई में साढ़े-बाईस,
आते हो स्कूल खाने करी और राइस।
आज जब प्रिंसिपल सर करेंगे तुम्हारा टेस्ट,
पाएंगे तुम सबको नीचे से बेस्ट।

अनुपम, तू बता कौन थे पृथ्वीराज?
सर, पृथ्वीराज थे फ़िल्मी दुनिया के सरताज़।
वाह नासपीटे कर दिया तूने कमाल,
अभी करे देता हूँ तेरे गाल लाल।
इतिहास की पुस्तक पढ़ी है,
या पढ़ी है फिल्म की?
सर, इतिहास की तो आप यहाँ पढ़ते हैं,
फिल्म की पढ़ पाता हूँ घर पर,
कहें तो आप को भी पढाऊँ ला कर।

चुप बे मुरख, रंजन तू बता-
हम पानी पीते हैं क्यूं?
सर, क्योंकि पानी को हम खा सकते नहीं यूं।

हे  भगवान, अब तू ही कर मेरा कल्याण,
घबराइए नहीं सर, ज़ल्द होगा आपका महाप्रयाण।
अबे गधे! शुभ-शुभ बोल।
सर, धीरे कहिये नहीं तो खुल जाएगी आपकी पोल।
हम अगर गधे, तो आप गधों के मास्टर  जायेंगे,
गधा  जगत में विशिष्ट स्तर को पाएंगे।

अच्छा, २१वीं सदी के भारत के उज्जवल भविष्य,
कुतुबमीनार कहाँ है, है पता?
नहीं सर। चल हो जा बेंच पर खड़ा।
सर, दिख नहीं रहा यहाँ से भी,
ओफ़्फ़्फ़ोह! करनी होगी शिकायत तेरे पिताजी से ही।
तेरा घर कहाँ है, तू बता?
सर, पोस्ट ऑफिस के सामने।
पोस्ट ऑफिस कहाँ है मुझे नहीं पता।
सर, मेरे घर के सामने।
अबे, दोनों कहाँ है ये बता।
सर, आमने-सामने।
ओह, ऐसे-ऐसों को पढाना ही है मेरी ख़ता।

तभी होता है प्रिंसिपल सर का प्रवेश,
शिक्षक महोदय के शब्द रहते जाते हैं शेष।
बच्चे हो जाते हैं खड़े।
मास्टर जी जा रहे हैं नीचे गड़े-गड़े।
बच्चों, करने जा रहा हूँ मैं तुम्हारी प्रगति की जांच,
आने ना देना अपने मास्टर जी की मेहनत पर आंच।

तुम बताओ अनुपम, फ्रांसीसी क्रांति कब शुरू हुई?
सर, १७८९ में।
वाह, बैठ जाओ।
तुम बताओ रंजन, होते कितने काल?
सर, तीन-  भूत, वर्तमान और भविष्यत् काल?
सच में इन्होंने पढाई की है लाजवाब।


प्रिंसिपल सर का जाना,

और मास्टर साहब की जान में जान आना।
बच्चों, मत किया करो इतना मजाक,
बताओ कोई प्रश्न पूछना है एट लास्ट।
सर, केवल पूछना रह गया है यह अब,
परीक्षा के प्रश्न-पत्र किस प्रेस में रहे हैं छप।

















------- नोट- जीवन मैग में प्रकाशित सामग्री के इस्तेमाल के लिए संपर्क करें  akash@jeevanmag.tk ------- बिना अनुमति प्रकाशन दंडनीय अपराध है-------


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Thursday, 6 June 2013

Tech Mantra- Download youtube videos without any downloader- Faisal Alam


Must Read- Swami Vivekananda Quotes 

Download YouTube videos without using YTD






Take for instance, You want to download this video-





What You will need :
VLC

1. VLC Media Player

2. A working internet connection




Procedure:

1. Copy the URL of YouTube video which you want to download.
   
 e.g- http://www.youtube.com/watch?v=q3sx9BEubdw

2. Open VLC media player on your computer.

3. Go to Media >> Open Network Stream or you can also press Ctrl+N to open required window.

4. Paste the YouTube video URL here and click on Play button on bottom side.


5. Now YouTube videos will start to play in VLC media player. while playing YouTube video in VLC media player. Go to Tools >> Media Information. This will open Media information window.


6. Copy the location of video.


7. Open any browser preferably Google chrome and paste the location of video copied from earlier step in address bar.


8. This will open that particular YouTube in your browser. While playing this video in browser, right click on video and select Save Video as option to save YouTube video at desired location.


9. In other browsers except Google chrome, you need to add file extension like mp4, flv, mpeg after file name while saving YouTube video.


e.g- http://www.youtube.com/watch?v=q3sx9BEubdw.mp4

So, Friends. Now, Uninstall all your Rubbish YouTube downloaders. They slow up your system and have the potential to harm it.

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& Yeah! we definitely tweet- @jeevanmag

Tech Mantra By- 


Faisal Alam

Public Relations officer
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If you are a wapsite/website adminitrator, boost your hits by adding it here-







Must Read- Free E-Books DVD & CD

Excerpted from Jeevan Mag January 2014. Download the PDF version of the magazine from here - https://ia600505.us.archive.org/7/items/JeevanMag4/Jeevan%20Mag%204.pdf

Thursday, 23 May 2013

CBSE Class X Results 2013

Central Board of Secondary Education (CBSE Class X) results for the year 2013are most likely to be declared on 24th May, 2013. They are of course the most-awaited. Last year declared on May 21, CBSE results are still concealed. According to sources, they can come onto the floor on 24th, 25th or may be 26th also. So, guys DIL THAM KE BAITHO AUR DEKHO HOTA HAI KYA.....

Check CBSE Results status Click Here 
or Here



KEEP YOUR SPIRIT UP LEST YOU SHOULD NOT LOSE IT UP BEFORE THE PRIME TIME...THUMBS UP TO CBSE FOR MAKING US GUINEA PIGS!!!!!!!

KEEP VISITING www.JeevanMag.tk 


Thanks....
Yours
Akash Man Of Sky (Click here to connect)
Ed-in-chief
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Wednesday, 1 May 2013

Interesting Facts- Gyanesh Kumar

Blood donation chart


- Leonardo da Vinci is supposed to have invented scissors.

- A camel is supposed to last longer without water but Rat can last even longer without it.

- Those who love ice-cream should know that Eskimo Pie is the first chocolate-covered ice cream bar and it was invented in Onawa, Iowa, USA in 1921.

- The world’s smallest island country is Nauru.

- The largest producer of gold is South Africa.

- The largest bell in the world is the Emperor Bell in Moscow, Russia. It is 20 ft or1 m tall.

- Do you know what is the name given to that little dot over “i”? It’s known as “tittle”.

- There are only few words in dictionary that don’t rhyme with any other words. These are orange, silver and purple.

- Mount Rushmore is perhaps the most impressive rock formation carved by men. It was made by Gutzon Borglum and took just 14 years to carve it.

- The famous Leonardo da Vinci could write with one hand and draw with the other at the same time.

- Like retina and finger print, every individual also has a unique tongue print.

- There are no less than 717 native languages in a small country known as Papua New Guinea.

- This must be exciting for hummingbirds as they can fly backward as well.

- ENIAC was the name of world’s first electronic computer. It was produced in 1946 and its size was humungous.

- Every Year a staggering number of 50 millions bicycles are produced. 


Source : India Child
By- Gyanesh kumar
The Aryans,
Dehradoon
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Monday, 29 April 2013

नारी- ममता किरण


वह नर पशु निरा समान,
करता नहीं जो सम्मान,
नारी को प्रताड़ित करता,
जग में करता उसका अपमान।
समय बदल गया,
संदर्भ बदल गया,
बदला न इनका अभिमान।
अतिशयता की सीमा कर पार,
ये कर रहे हैं दुराचार।
मौन हैं जब तक, बचे हैं तब तक।
तन जायेंगी जिस दिन‍-
ये तन्वियाँ;       
नाश पाप का कर करेंगी,
दुष्ट प्रवृतियों का संहार।
रोक सकेगा न इनको‍-
कोई बल,
छल सकेगा न इनको-
कोई छल,
बदलेंगी जब ये हवाएँ,
बदलेंगी तब ये मानसिकताएँ।
मुस्कुरा उठेंगी‍-
ये जीवनदायिनी,
जो करती सृष्टि का निर्माण;
निर्माण की जो दुर्गा हैं,
जो इनको निर्मित करती हैं,
क्यों नहीं-
नर करते इनका सम्मान।
‍ममता किरण 
शोधार्थी (हिन्दी)
बिहार विवि, मुज॰

Monday, 1 April 2013

मुर्ख दिवस का औचित्य- नंदलाल मिश्रा



प्रस्तुति- नंदलाल सुमित

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प्रत्येक वर्ष एक अप्रैल को लगभग आधी से अधिक दुनिया मेँ फूल्स डे यानि
मुर्ख दिवस मनाया जाता है| वेलेँटाइन डे की ही भांति हम इसे सहज ही
पश्चिमी दुनिया की भेँट मान कर हेय दृष्टि से देखते हैँ और फालतू की चीज
समझ बैठे हैँ | यदि हम इसके तह तक जाने की कोशिश करेँ तो पता चलेगा कि यह
हरेक सभ्यता मेँ किसी न किसी रुप मेँ मौजूद है| सामान्यतःइस दिन लोग एक
दूसरे को मजाकिया धोखे देते हैँ, ठगते हैँ, ताने कसते हैँ, चुटकुले कहते
सुनते हैँ और हँसी-मजाक करतेहैँ | भारत मेँ इसका उत्साह सिर्फ बच्चोँ
मेँ दिखता है जबकि इसकी अधिक जरुरत बड़ोँ को है | अच्छा रहेगा कि इस वर्ष
हम इसके औचित्य की पड़ताल करेँ और होली -दिवाली, ईद और क्रिसमस की तरह
अपने जीवन मेँ स्वीकार करेँ|
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दिवस का प्रथम लिखित प्रमाण चाउसर नामक एक यूरोपीय लेखक द्वारा 1392 मेँ
लिखी कहानी 'डनस प्राइस्टस् टेल' मेँ मिलता है | इस कहानी मेँ एक धुर्त
लोमड़ी एक मुर्गे को बुद्धू बनाते हुए अपनी ठगी के जाल मेँ फँसाकर अंत मेँ
सफाचट कर जाता है | लेखक इस घटना के दिन को उलझाकर कुछ यूँ व्यक्त करता
है- यह घटना उस महीने (सायन मार्च) के शुरुआत के 32 दिनोँ के बाद की है
जिसमेँ नये साल की शुरुआत होती है और जिसमेँ भगवान ने पहले इंसान को पैदा
किया था | कुल मिलाकर यह दिन 1 अप्रैल ही निकलता है | वहीँ क्रमशः सन्
1508 एवं 1539 मेँ फ्रेँच और फ्लेमिश कवियोँ इलाय डि अमीरवल तथा एडवर्ड
डि डेन की हास्य कविताओँ मेँ भी इसकी चर्चा मिलती है| मुर्ख दिवस के प्रारंभ
की सर्वाधिक मान्य कहानी भी काफी दिलचस्प है| सन् 1500 से पुर्व नये साल
की शुरुआत 25 मार्च से एक सप्ताह तक जश्न-ए-उत्सव मनाया जाता था जो एक
अप्रैल को बड़े धूम धाम से समाप्त होता था | लेकिन 1500 ईस्वी के बाद
ग्रेगोरियन कलैँडर के प्रचलन मेँ आ जाने से शिक्षित और जानकार लोगोँ ने 1
जनवरी को नव वर्ष उत्सव मनाना शुरु कर दिया | परंतु तब भी यूरोप की एक
बड़ी अनभिज्ञ आबादी मार्च-अप्रैल मेँ ही उत्सव मनाती आरही थी | जब यह
उत्सव एक अप्रैल को अपने अंतको पहुँचता तो जानकार लोग उन्हेँ हकीकत
बताकर उनका मखौल उड़ाते | यह सिलसिला कई वर्षोँ तक जारी रहा और फूल्स डे
नाम से एक उत्सव बन गया | मुर्खदिवस के शुरुआत की कहानियोँ व
इतिहासकारोँ के विचारोँ से निकलता है कि यह नये
साल के आगमन को मनाने का पुराना अंदाज था जो आज नये स्वरुप मेँ विद्यमान
है |

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नये ईरानी साल की शुरुआत के 13वेँ दिन लोग एक दूसरे से हँसी मजाक करते
हुए जश्न मनाते हैँ जिसे वहाँ सिजदाह बेदर कहा जाता है| अंग्रेजी कैलेँडर
से यह 1 या 2 अप्रैल का दिन होता है| लोगोँ का मानना है कि यह परंपरा ईसा
के जन्म के पहले से जारी है| फ्रांस, इटली एवं बेल्जियम मेँ एक अप्रैल को
पेसकी-डि-अप्रिल ­ (अप्रैल फिश) मनाया जाता है| इस दिन लोग एक दूसरे की
पीठ पर मछलीनुमा स्टीकर चिपकाकर हँसी मजाक करते हैँतथा लतीफ़े कहते सुनते
हैँ|
पोलैँड और तुर्की मेँ प्रीमा (एक) अप्रैल जोक्स, हँसी- मजाक एवं मजाकिया
धोखोँ से भरपूर दिन माना जाता है| कभी कभी तो मीडिया भी लोगोँ को ठगती
नजर आती है | स्कॉटलैँड मेँ इस दिन को हंट- दि- गॉउक डे कहा जाता है
| स्वीडन और डेनमार्क मेँ एक मई को मेज़-कैट जोकिँग डे अर्थात मजाकिया दिन
के रुप मेँ मनाने की परंपरा रही है | स्पेन मेँ यह दिन 28दिसंबर को
मनाया जाता है | इसी को रोमन सभ्यता मेँ 15वीँ -16वीँ सदी मेँ फीस्ट ऑफ
फूल्स के रुप मेँ मनाया जाताथा | चीन और अमेरिकी देशोँ मेँ भी मुर्ख
दिवस लंबे समय से एक अप्रैलको मनाया जाता रहा है | यह दिन और उत्सव हमेँ
हँसी मजाक के साथ साथ महान हास्य प्रतिभाओँ को भी स्मरण करने का मौका
प्रदान करती है|
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संयोग से जिस अप्रैल महीने की पहली तारीख को मुर्ख दिवस मनाया जाता है,
उसी महीने की 16 तारीख को महान हास्य कलाकार चार्ली चैप्लिन का भी जन्म
हुआ था | इस अभिनेता फिल्मकार ने अपने जीवन चरित्र एवं सिनेमा के माध्यम
से 'अपने दुखोँ की कीमत पर दूसरोँ को खुश करने' के अनमोल मानवीय सिद्धांत
को स्थापित किया जिसे पूरे विश्व ने सामाजिक ,आर्थिक एवं सांस्कृतिक
विषमता से दूर रहकर एक समानलोकतांत्रिक भाव से स्वीकारकिया |
अपने फिल्मोँ मेँ चार्ली नायक है और जोकर भी | इससे पहले नायक के अपने
उपर हँसने-हँसाने का प्रचलन नहीँ था | उन्होँने हास्य एवं करुणा के
अद्भुत सामंजस्य से नये कला सिद्धांत को जन्म दिया जो पहले के किसी
संस्कृति या साहित्य मेँ नहीँ मिलता है | वह हर 10वेँ सैकेँड मेँ अपने को
संकट मेँ घिरा पाता है, अपने को मुर्ख बनाता है, धोखा खाता है, गिरता
है.... संभलता हैँ... अजीबो-गरीब हरकतेँ करता है और लोग हँस देते हैँ |
वस्तुतः वह एक जोकर है कॉमेडियन नहीँ | जोकर और कॉमेडियन मेँ फर्क है |
जोकर हास्य और करुणा का मिश्रण होता है | उसमेँ रुलाने और हँसाने दोनोँ
की क्षमता होती है ,मगर वह रोता खुद है जबकि औरोँ को हँसाता है | जोकर
बातोँ से कम अपने संकट मेँ घिरे हालात, दयनीय चेहरा और लड़खड़ाते हरकतोँ से
ऐसा करता है | उसकी खुद की हँसी बनावटी होती है| कॉमेडियन इन अर्थोँ मेँ
जोकर से बिल्कुल भिन्न होतेहैँ | बस्टर कीटन चार्ली से बड़ी हास्य
प्रतिभा थे किँतु वे कॉमेडियन अधिक थे जोकर कम ; सो उतने लोकप्रिय और
प्रभावी न हो सके जितने कि चैप्लिन | चार्ली को जिसने भी- जहाँ भी देखा
,उसमेँ 'हम' को पाया | यही वजहहै कि आम आदमी को अक्सर और सहज भाव मेँ ही
चैप्लिन की उपमा दे दी जातीहै क्योँकि हम सभी सुपरमैन नहीँ हो सकते हैँ
| दरअसल मनुष्य स्वयं नियति का विदूषक, क्लाउन या जोकर है |
उनकी व्यापक जन स्वीकृति के कारण ही कभी गांधी और नेहरु ने भी उनका
सानिध्य चाहा था | राजकपूर ने नकल के आरोपोँ की परवाह किये बगैर चैप्लिन
का भारतीयकरण कर डाला | आवारा ,श्री 420 और मेरा नाम जोकर जैसी फिल्मेँ
नायकोँ के अपने पर हँसकर जगको हँसाने के सिद्धांत पर आधारित हैँ |
भारत की संस्कृति मेँ एकमात्र होली का त्योहार ही हमेँ जानबूझ कर स्वयं
को हास्यास्पद बनाने का अवसर प्रदान करती है | संयोग से यह भी मुर्ख दिवस
के आसपास ही मनाया जाता है तथा इसका और भी सहज एवं मुखर रुप है| फिर कैसे
न कहेँ कि मुर्ख दिवस एक विश्वव्यापी उत्सव है| बसंत ऋतु मेँ इसके मनाये
जाने के पीछे कुछ विद्वानोँ का यह भी मत है कि प्रकृति हमेँ शरद-बसंत
परिवर्तन द्वारा मुर्ख बनाती है | सच्चाई जो
भी हो किंतु यह दिन हमेँ इस अशांत तथा तनावग्रस्त संसार मेँ खुद को
हँसने-हँसाने और तरोताजा होने का मौका प्रदान करता है| यह जातीय एवं
मजहबी संकीर्णताओँ से मुक्त उत्सव है जो हमारी लोकतांत्रिक भावनाओँ को और
अधिक बढावा देगा |
बेहतर होगा कि हम चैप्लिन के सिद्धांत के अनुयायी बनेँ; इस दिन दूसरोँ
को चिढ़ाने- बेवकूफ बनाने और धोखा देने की बजाय खुद पर हँस कर जग को
हँसायेँ तथा औरोँ मेँ भी यह माद्दा पैदा करेँ |
फिल्म मेरा नाम जोकर का यह गीत तो आपको याद ही होगा-
अपने पे हँस के जग को हँसाया,
बन के तमाशा मेले मेँ आया ,
हिँदू न मुस्लिम पूरब न पश्चिम ,
मजहब है अपना हँसना हँसाना,
कहता है जोकर सारा ज़माना......
यकीन जानिये,इस लेख मेँ मैँने आपको कहीँ नहीँ ठगा है|

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नंदलाल मिश्रा
(लेखक 12वीँ के छात्र एवं युवा विचारक हैँ )

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A series of skype group conversations beetween students from India & Pakistan

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